Thursday, 30 January 2014

navdurga sadhna

नवरात्र साधना विधान  ...

 नवरात्रि को साधारणतः नव दुर्गा  पूजा व साधनाए साधक जन किया करते है ..और उन्ही नवदुर्गाओ की मंत्र ही जपा करते है

किन्तु मेरे आत्मन ! हम तांत्रिक है और तांत्रिक साधनाए ही करते है वैदिक साधना नहीं .. क्योंकि भगवान ने भी यही कहा है की  कलियुग में केवल तांत्रिक मन्त्र और साधनाए ही पूर्ण फल प्रदान करने में सक्षम होंगे ..

 और इसी कारण ही अब की बार नवरात्र में नवदुर्गाओ की जो तत्व है उसी तत्व स्वरूपी महामाया शक्ति का  उन विशिष्ट शक्तिओ की ही पूजा व जाप मंत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ ..

और यह सभी मन्त्र नव दुर्गा के मंत्र से भिन्न है .. क्योंकि मुझे लगता है नव दुर्गा  का अर्थ को समझ कर अगर उसका सार तत्व को ही साधा जाय तो उत्तम होगा ..  क्योंकि तंत्र यह कहता है यही वोह नव निधि है जिसका उल्लेख शास्त्र में आता है ..  माँ तारा की कृपा से आप सब भी नव निधि सम्पन्न हो यही कामना करते हुए आप के सामने पोस्ट को रख रहा हूँ ..

1 शैलपुत्री जो  त्रैलोक्य मोहन कार्य अर्थात तीनो लोको को मोहित कर देने वाली शक्ति है ..
मंत्र ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वजन मनोहारिणी नमः स्वाहा 

2 ब्रह्मचारिणी जो समस्त इच्छाओ को पूरण करने वाली शक्ति है ..
मंत्र ऐं क्लीं सौः कामेश्वरीच्छा काम फल प्रदे देवी नमः स्वाहा 

3 चन्द्रघंटा जो समस्त प्रकार की पापो का हनन करने वाली शक्ति है ..
मंत्र श्रीं क्लीं ह्रीं ऐं सर्वपापसंहारिके देवी नमः स्वाहा

 4 कुष्मांडा जो सर्व सौभाग्य प्रदान करने वाली शक्ति है ..
मंत्र ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः सर्व सौभाग्य प्रदायिनी देवी नमः स्वाहा

5 स्कन्दमाता जो  समस्त प्रकार की कार्य को सिद्धि करने वाली शक्ति है चाहे वो शांति कर्म हो या मारण कर्म..
मंत्र ऐं  ईं हौं सः कामत्रिपुराय नमः स्वाहा

 6 कात्यानी जो सर्व प्रकार की रक्षा करने वाली शक्ति है ..
मंत्र ॐ ह्रीं महायक्षीश्वरी रक्षय रक्षय मम शत्रुनाम भक्षय भक्षय स्वाहा

 7काल रात्रि जो समस्त प्रकार की रोग नाश करने वाली शक्ति है ..
मंत्र ॐ कालि कालि काल रात्रिके मम सर्व रोगान छिन्धि छिन्धि  भिन्दी भिन्दी भक्षय भक्षय नमः स्वाहा

 8 महागौरी जो समस्त प्रकार की आनंद को देने वाली शक्ति है..
मंत्र ह्रीं क्लीं ॐ सर्व आनंद प्रदायिने  नित्य मदद्रवे स्वाहा

 9 सिद्धिदात्री जो समस्त प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाली है ..
मंत्र स्त्रीं हूँ  फट क्लीं ऐं तुरे तारे कुल्ले कुरु कुल्ले नमः स्वाहा

इन शक्तिओ की मंत्र साधना आप नव रात्र के दौरान कर सकते है ..

विधान व सामग्री ..............

लाल वस्त्र आसनी ..दिशा उत्तर .. माला  रुद्राक्ष की या लाल चन्दन की गले में रुद्राक्ष होना अनिर्वार्य है ..

माँ तारा के चित्र के सामने नौ दीपक शुद्ध घी के प्रज्वलित कर उन दीपकों को नव दुर्गा स्वरुप मान कर नौ दिन लगातार इन्ही दीपकों को प्रज्वलित करे और  गुरु पूजन आज्ञा लेकर बिना संकल्प लिए यह साधना करना होता है ...दीपक बदलना नहीं बस बत्ती छोटा  हो जाय तो उसे बदल दीजियेगा ..


कौलिक शिव एक दिन में एक मंत्र को प्रतिदिन 16 माला और बाकी के भक्त 21 माला जाप करे ...एक एक कर नौ दिन में नौ मंत्र का जाप पूरा हो जाता है ..

इसके बाद दशमी को  सभी सामग्री दीपक फोटो को विसर्जन कर दे .. माला को नहीं ...किसी कुमारी कन्या को भोजन करवाके उनसे आशीर्वाद ले या फिर किसी अनाथ आश्रम में पैसे दान करदे .. अगर आप किसी जरुरतमंद को भी दान कर देते है तो भी विधान पूर्ण माना जायेगा ... जय माँ तारा ..

Sunday, 5 January 2014

तीव्र इच्छा पूर्ती धूमावती साधना

                                                      तिव्र ईच्छा पुर्ति धुमावती साधन-





धूमावती साधना एक सफल अनुभूत और तीव्र प्रभाव युक्त प्रयोग है ..
यह केवल एक दिन की ही साधना है और अपने जो भी इच्छा हो वोह भगवती अवस्य पूरी करती है ..
विषम परिस्थिति में आप यह साधना नौ दिन तक जारी रखे ..
वैसे तोह एक ही दिन बहुत है इस साधना के लिए पर हमारे अन्दर उर्जा के कमी के कारण कभी कभी हमरे द्वारा किया गया साधना सफल नहीं होता है पर इसमें ऐसा नहीं है भगवती अवस्य ही मनोकामना पूरी करती ही है ..


विधान ................
अपने सामने गोबर के उपले ज्वाला के उसमे गुग्गल दाल के धुआ करते रहे साधना के वक्त लगातार धुआ होते रहना अवश्यक है ..

माला रुद्राक्ष की ..11 माला जाप करना है
दिन .. शनी वार . मंगल वार  ,रवि वार , या किसी भी दिन ...
समय रात के महा निशा ..
स्थान जहा आप को सुबिधा हो और कोई परेशां न करे ..
वस्त्र व् आसानी लाल ..
दिशा उत्तर या आप के सुविधा अनुसार ..
आसन  पद्म आसन ..

मंत्र ,,,,,,
आई आई धूमावती माई ..
सुहाग छेड़े कोन कुले जाई ..
धुआ होय धू धू कोरे .
आमार काज ना कोरले .
शिबेर जोटा खोसे भुमिते पोड़े ...

aai aai dhumawati maai..
suhag chhede kon kule jaai ..
dhua hoy dhu dhu kore ..
aamar kaaj naa korle
shiber jota khose bhumite pode..
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जय जय तारा ..
जय वाम ..गुरु वाम ..

Thursday, 26 December 2013

DHAN PRAPTI SADHNA

धन प्राप्ति के लिए  साधना




धन ... यह किसे नहीं चाहिए ..
मुझे क्या देवताओ को भी जरुरत होता है ...
इसी लिए आप सबके सामने एक ऐसा प्रयोग दे रहा हूँ ..ताकि आप के आर्थिक समस्या सुलझ जाए ..


बंगाल की रानी .. करे मेहमानी ..
मुंज बनी के कावा.. पद्मावती बैठ खावे मावा..
सत्तर सुलेमान ने हनुमान को रोट लगाया ..
हनुमान ने राह संकट हराया..
तारा देवी आवे घर हात उठाके देवे वर ..
सतगुरु ने सत्य का शब्द सुनाया ..
सुन योगी आसन लगाया ..
किसके आसन? किसके जाप ?
जो बोल्यो सत गुरु आप ...
हर की पौड़ी लक्ष्मी की कौड़ी ..
सुलेमान आवे चढ़ घोड़ी ..
आउ आउ पद्मा वती माई करो भलाई
न करे तोह गुरु गोरक्ष की दुहाई..।।...

bangal ki raani .. kare mehmani .
munj bani ke kawa.. padmawati baith khawe mawa..
sattar suleman ne hanuman ko rot lagaya . hanumaan ne rah sankat haraya..
tara devi aawe ghar.. haat uthake dewe var..
sat guru ne satya ka shabd sunaya ..sun jogi aasan lagaya..
kiske aasan ? kiske jaap ..? jo bolyo sat guru aap..
har ki paudi ..lakshmi ki kaudi..suleman aawe chadh ghodi..
aau aau padmawati mai karo bhalai..naa kare toh guru goraksh ki duhai..

इस मंत्र का रोज 108 पाठ लगातार 41 दिन तक सब सुद्ध् वस्त्र दिशा समय सुविधा अनुसार...

मंत्र स्वम सिद्ध है बस रोज 108 जप करना है आप स्वम आश्चर्य हो जायेंगे इस के प्रभाव देख
शावर मन्त्र में यह ही एक ऐसा मंत्र है जिसमे समस्त देव शकतो ी सायुज्य कर्ण किया गया है लक्ष्मी तारा पद्मावती धन से सम्बन्ध ..हनुमान जी रस्ते की समस्त संकट को मिटा देता है ताकि आप पास धन को आने में कोई व्यवधान न हो.सत्तर सुलेमान सातों द्वार को खोल देता है..हर की पौड़ी मतलव दैवी कृपा से है ..लक्ष्मी की कौड़ी स्वर्ण व् गड़े हुए खजाने से है.. और भागती तारा स्वाम पद्मावती को खाना खिलाती है और दोनों एक साथ सीधा आप के घर आके आप को लक्षिम वान होने की वरदान देके जाते ...----------
जय जय तारा ..
जय वाम गुरु वाम ..